कैसे ऑनलाइन सेलिंग प्लेटफॉर्म छोटे और नए विक्रेताओं से (Fraud) राजस्व उत्पन्न करते हैं: एक कड़वी सच्चाई
यहीं से Fraud की शुरुआत होती है. डिजिटल युग में ऑनलाइन मार्केटप्लेस को छोटे व्यापारियों के लिए सुनहरा अवसर बताया जाता है। कहा जाता है कि कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपना बिज़नेस शुरू कर सकता है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कहीं अलग है। आज हजारों छोटे और नए विक्रेता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ तो जाते हैं, लेकिन धीरे-धीरे एक ऐसे चक्र में फँस जाते हैं जहाँ हर स्थिति में केवल प्लेटफॉर्म ही कमाई करता है — विक्रेता नहीं।

नए सेलर्स के साथ धोखा
1. फर्जी ऑर्डर (Fraud): शुरुआत यहीं से होती है
नए विक्रेताओं को यह विश्वास दिलाया जाता है कि प्लेटफॉर्म पर आते ही ऑर्डर मिलना शुरू हो जाएगा। कई बार विक्रेताओं को ऐसे ऑर्डर मिलते हैं जो:
- कस्टमर द्वारा जानबूझकर कैंसल कर दिए जाते हैं
- डिलीवरी के समय रिसीव नहीं किए जाते (COD में)
- गलत पते या फर्जी नंबर पर होते हैं
इन ऑर्डर्स पर विक्रेता:
- पैकेजिंग का खर्च उठाता है
- लॉजिस्टिक्स चार्ज देता है
- कमीशन और पोर्टल फीस भरता है
ऑर्डर फेक हो या असली, प्लेटफॉर्म को हर हाल में फीस मिल जाती है।

2. पैकेजिंग मटेरियल का अनिवार्य बोझ (Fraud)
कई प्लेटफॉर्म विक्रेताओं को खास पैकेजिंग मटेरियल खरीदने के लिए मजबूर करते हैं:
- ब्रांडेड बॉक्स
- लेबल
- टैप और पाउच
यह मटेरियल अक्सर बाजार से महंगा होता है। चाहे ऑर्डर डिलीवर हो या रिटर्न, यह खर्च विक्रेता का होता है — प्लेटफॉर्म का नहीं।
3. COD, Return और Refund पॉलिसी का दुरुपयोग (Big Fraud)
Cash on Delivery (COD) छोटे विक्रेताओं के लिए सबसे बड़ा जोखिम है:
- ग्राहक ऑर्डर कर लेता है, लेकिन डिलीवरी पर मना कर देता है
- रिटर्न में खराब या बदला हुआ प्रोडक्ट वापस आता है
- रिफंड तुरंत ग्राहक को, लेकिन विक्रेता को भुगतान हफ्तों बाद
रिटर्न का कारण चाहे कुछ भी हो, लॉजिस्टिक्स और हैंडलिंग चार्ज विक्रेता से ही काटा जाता है।
4. फर्जी ऑर्डर पर भी कमीशन और पोर्टल फीस
यह सबसे चौंकाने वाली बात है कि:
- कैंसल या रिटर्न हुए ऑर्डर पर भी
- फर्जी COD ऑर्डर पर भी
प्लेटफॉर्म:
- कमीशन
- फिक्स्ड पोर्टल फीस
- कलेक्शन चार्ज
सब कुछ काट लेता है। यानी जहाँ विक्रेता को घाटा होता है, वहीं प्लेटफॉर्म का मुनाफा तय होता है।
5. जबरन विज्ञापन (Ads) चलाने का दबाव
नए विक्रेताओं को साफ संकेत दिया जाता है:
“Ads चलाओगे तभी ऑर्डर आएंगे।”
ऑर्गेनिक (बिना ऐड) ऑर्डर लगभग बंद कर दिए जाते हैं। विक्रेता:
- रोज़ाना ऐड पर पैसे खर्च करता है
- लेकिन ऑर्डर कन्वर्ज़न बहुत कम होता है
यह विज्ञापन खर्च सीधे प्लेटफॉर्म की जेब में जाता है, चाहे बिक्री हो या नहीं।
6. COD में प्रतिस्पर्धियों द्वारा फर्जी ऑर्डर
कई मामलों में:
- प्रतिस्पर्धी जानबूझकर COD ऑर्डर डालते हैं
- डिलीवरी पर ऑर्डर रिसीव नहीं करते
नतीजा:
- प्रोडक्ट फँस जाता है
- रिवर्स लॉजिस्टिक्स का खर्च
- सेलर रेटिंग खराब
लेकिन प्लेटफॉर्म को:
- लॉजिस्टिक्स चार्ज
- पोर्टल फीस
- एक्टिविटी बढ़ने का डेटा
सब मिल जाता है।
7. हर स्थिति में केवल प्लेटफॉर्म की कमाई
अगर ध्यान से देखा जाए तो:
- ऑर्डर डिलीवर हो → प्लेटफॉर्म कमाए
- ऑर्डर रिटर्न हो → प्लेटफॉर्म कमाए
- ऑर्डर फर्जी हो → प्लेटफॉर्म कमाए
- विक्रेता ऐड चलाए → प्लेटफॉर्म कमाए
घाटा सिर्फ विक्रेता का होता है।
निष्कर्ष
ऑनलाइन सेलिंग प्लेटफॉर्म खुद को “मध्यस्थ” बताते हैं, लेकिन उनकी नीतियाँ ऐसी बनाई गई हैं कि जोखिम पूरा विक्रेता उठाता है और लाभ पूरा प्लेटफॉर्म। छोटे और नए विक्रेताओं के लिए यह सिस्टम धीरे-धीरे आर्थिक और मानसिक दबाव बन जाता है।
जब तक:
- पारदर्शी पॉलिसी
- फर्जी ऑर्डर पर सुरक्षा
- निष्पक्ष रिटर्न सिस्टम
नहीं बनाया जाता, तब तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म छोटे विक्रेताओं के लिए अवसर नहीं, बल्कि एकतरफा मुनाफे का जाल बने रहेंगे।
